बुधवार, 3 मार्च 2010

जी चाहता हे

तेरी सांसो में उतर जाने को जी चाहता हे

तेरी जुल्फों में संवर जाने को जी चाहता हे

जिन्दा रखा हे तेरे अहसासों ने हमको

तेरी बाँहों में मर जाने को जी चाहता हे

शुक्रवार, 26 फ़रवरी 2010

जिंदगी एक dagar

ये जिंदगी एक डगर हे तू अपने कदम बढ़ाये जा
जमाने के अंधेरे में तू प्यार का दीप जलाये जा

मानकी उफान पर हे समंदर
लहरों में भी उन्माद का हे मंजर
तू लहरों से लड़कर, किश्ती को साहिल पर लगाये जा
ये जिंदगी एक डगर हे तू अपने कदम बढ़ाये जा

बुझता हा दिया लौ के थम जाने पर
डूबता हा सूरज शाम के आ जाने पर
तू शाम के माथे पर रौशनी का तिलक लगाये जा
ये जिंदगी एक डगर हे तू अपने कदम बढ़ाये जा

पथ में आते हा कुछ क्षणिक सुखद ठहराव
पथ में आते हे कुछ क्षणिक दुखद ठहराव
तू इन ठहरावो को भुलाकर नई राह बनाये जा
ये जिंदगी एक डगर हे तू अपने कदम बढ़ाये जा

वक्त के थपेड़े धुंधला देते हा सपनो को
धूल भरी आंधियां उजाड़ देती हे उपवनो को
इस उजड़े उपवन में तू नया गुलशन खिलाये जा
ये जिंदगी एक डगर हे तू अपने कदम बढ़ाये जा

बुरे वक्त में अपने भी छोड़ जाते हे साथ
नही मिलता कोई सहारा देने वाला हाथ
घर बदल जाते हा सूने मकानों में
तू सूने मकानों में नया आशियाँ बसाए जाया

ये जिंदगी एक डगर हे तू अपने कदम बढ़ाये जा
वक्त के थपेड़ो को भुलाकर, नया इतिहास रचाए जा



मंगलवार, 23 फ़रवरी 2010

कोशिश

लहरों से डर कर नौका पार नहीं होती,कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
नन्हीं चींटी जब दाना लेकर चलती है, चढ़ती दीवारों पर, सौ बार फिसलती है।
मन का विश्वास रगों में साहस भरता है, चढ़कर गिरना, गिरकर चढ़ना न अखरता है।
उसकी मेहनत बेकार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
डुबकियां सिंधु में गोताखोर लगाता है, जा जा कर खाली हाथ लौटकर आता है।
मिलते नहीं सहज ही मोती गहरे पानी में, बढ़ता दुगना उत्साह इसी हैरानी में।
मुट्ठी उसकी खाली हर बार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती।
असफलता एक चुनौती है, इसे स्वीकार करो,क्या कमी रह गई, देखो और सुधार करो।
जब तक न सफल हो, नींद चैन को त्यागो तुम, संघर्श का मैदान छोड़ कर मत भागो तुम।
कुछ किये बिना ही जय जय कार नहीं होती, कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती

शुक्रवार, 15 जनवरी 2010

However slow I am walking, I never walk backwards
whenever I walk backwards, its for a long jump.

बुधवार, 6 जनवरी 2010

परिंदों ने भरी हे एक उड़ान

पंखो का इम्तिहान अभी बाकी हे

अभी तो नापी हे मुट्ठी भर जमी

सारा आसमान अभी बाकी हे

उन अधखुले होठो से मेरा नाम निकला था

दुआ उन्होंने काबुल की, प्यार का पैगाम निकला था

आज तक पीकर बेसुध हूँ,

उन आँखों से जो जाम निकला था

गुरुवार, 31 दिसंबर 2009

मानकी हम मिल न पाए, पर तेरा प्यार मिला ये क्या कम हे

तुने चाहतो के फूल मुझ पर लुटाये, अगर मिल भी न पाए तो क्या गम हे